भारत की hydroxychloroquine कोरोना के इलाज में हुई फेल
हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे स्वस्थ होंगे फिट होंगे ।भगवान आपको और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें । आज हम बात करने जा रहे हैं की क्या सच में हाइड्रोक्लोरिक दवा काम नहीं आ रही है?
इस दवाई को कोरोना का इलाज बताया जा रहा था यानी कि हाइड्रोक्सी फ्लोरो क्लीन की गोली ।जिसकी मीडिया खूब खबर चलाई और उसको कोरोना का तोड़ बताया था ।
आज ये दवाई कोरोना के सामने फेल होती दिखाई दे रही है कोरोना के मरीजों पर इसका कोई असर नहीं हो पा रहा है।
दोस्तों आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से भारत में बनने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रो क्लोरो चर्चा हो रही है।
अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के अलावा 30 से ज्यादा
देशों ने भारत से हाइड्रोक्सी फ्लोरो क्लीन की आपूर्ति के लिए कहा भारत दुनिया का इस दवा का उत्पादक देश है ।
एंटीमलेरियल दवा है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कोरोना की लड़ाई में कई बार गेम चेंजर बता चुके हैं।जिसकी वजह से
इसकी भारी मांग को देखते हुए भारत में दवाई के निर्यात पर पाबंदी हटाने की घोषणा करती हैं।
और इस दवाई को दुनिया में एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया
जिससे मीडिया ने तो भारत को सुपर पावर ही घोषित कर दिया था। कि कैसे भारत एक विश्व शक्ति बनकर उभरा है
आपकी जानकारी बता दे कि दुनिया भर में मेड इन इंडिया हाइड्रो क्लोरो की बढ़ती मांग के बीच वैज्ञानिक और तमाम
देशों के health expert अब कोरोनावायरस से लड़ने की इस दवा की भूमिका को खारिज करने लगे हैं।
कई वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रो फ्लोरो क्लीन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के खिलाफ आगाह भी किया है।
इस दवा का कोरोना के साथ कोई संबंध नहीं है।
हाइड्रो क्लोरोलनी का इस्तेमाल सामान्य तौर पर आर्थराइटिस लूकस और मलेरिया के उपचार में होता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने लोगों को बिना चिकित्सीय परामर्श के हाइड्रोक्लोरिक की दवा को न लेने की सलाह दी है ।
क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक की दवा लेने से खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
आईसीएमआर ने अपने एडवाइजरी में कहा है कि हाइड्रोक्लोरिक लैब स्टडी में कोरोना वायरस के संक्रमण के
खिलाफ शुरुआती बचाव में मददगार साबित हुई थी हालांकि क्लीनिकल ट्रायल में दवाई की सीमित सफलता वायरस को ठीक करने के लिए दवाई का प्रयोग सफल नहीं हुआ।
हालांकि आपको बता दें पिछले महीने इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट में प्रकाशित फ्रेंच वैज्ञानिकों की एक स्टडी में बताया गया।
कि 20 मरीजों के हाइड्रो क्लोरो क्वीन से इलाज के बाद उनमें वायरल रोड में कमी आ गई इसके अलावा बाकी मरीजों की तुलना में इस दवा का इस्तेमाल करने वालों के शरीर में वायरस ज्यादा लंबे समय तक मौजूद नहीं रहे ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाला देते हुए ऑक्सिक्लोरो क्वीन को लगातार गेम चेंजर लेकिन।
आप स्टडी के प्रकाश को ने कहा है कि तमाम मानकों के अनुरूप नहीं है।
इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट ने इस स्टडी को लेकर तमाम सवाल खड़े किए हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि शोधकर्ताओं ने अपने डेटा में उन मरीजों को शामिल नहीं किया था। जिन पर हाइड्रोक्लोरिक वीन ट्रीटमेंट का अच्छा असर नहीं देखने को मिला कुछ मरीजों की इस दवाई को लेने के बाद हालत और खराब हो गई और कुछ लोगों की जानें भी चली गई ।
शोधकर्ताओं ने 26 मरीजों के साथ प्रयोग की शुरुआत की लेकिन छह मरीजों को ट्रायल के बीच में छोड़ना पड़ा स्टडी के मुताबिक दल में शामिल तीन मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
चौथे मरीज की मौत हो गई जबकि एक मरीज को उल्टी की शिकायत होने पर हाइड्रोक्लोरिक देना बंद कर दिया।
स्वीडन में कोरोना वायरस के मरीजों में मलेरिया के दवा का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इससे मरीजों में भयानक सिर दर्द और वजन लॉस जैसी समस्याएं हो रही है।
इस दवा को देने के कुछ दिन बाद ही कई मरीजों में माइग्रेन उल्टी आंखों की रोशनी कम होने जैसे साइड इफेक्ट नजर ।
आने लगे 100 में से 50 में क्लोरीन दवा की वजह से हार्टबीट में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
हार्ट बीट बढ़ने या घटने की वजह से हार्टअटैक तक की नौबत आ सकती है। मेडिकल वेबसाइट के मुताबिक हाइड्रोक्लोरिक सिर्फ ट्रायल तक रखा गया है।
चीन और फ्रांस में शुरुआती सफलता के बावजूद यूरोपियन एजेंसी ने कहा कोरोना वायरस साबित नहीं हुई है।
वहीं ब्रिटेन ने ट्रायल खत्म ना होने तक इस दवा का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।
U.k प्रोफेसर एंथोनी गार्डन ने भी बताया कि अभी तक इस बात के कोई सबूत नहीं है।
कि क्लोरोक्वीन या हाइड्रोक्सी क्लोरोक्रोरीन कोरोना वायरस के इलाज में सरदार हैं या नहीं।
मिलते हैं दोस्तों अगली आर्टिकल में किसी अन्य खबर के साथ ऐसे ही कोरोना अपडेट के लिए shocking news चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और हां comment , share कर देना।
धन्यवाद।
जय हिंद जय भारत।
एक YouTube channel गरीब लड़के का है फाइनेंसियल कंडीशन घर की ठीक नहीं है इसलिए उसने अपना यूट्यूब चैनल बना रखा है तो मेरी आप सब से विनती है कि इसके चैनल में जाओ सब्सक्राइब लाइक और शेयर कर देना प्लीज।
भारत की हाइड्रोक्लोरिक दवा करोना के इलाज में हुई फेल।
भारत की गेम चेंजर दवा को लेकर पूरी दुनिया में छाने लगी मायूस ।इस दवाई को कोरोना का इलाज बताया जा रहा था यानी कि हाइड्रोक्सी फ्लोरो क्लीन की गोली ।जिसकी मीडिया खूब खबर चलाई और उसको कोरोना का तोड़ बताया था ।
आज ये दवाई कोरोना के सामने फेल होती दिखाई दे रही है कोरोना के मरीजों पर इसका कोई असर नहीं हो पा रहा है।
दोस्तों आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों से भारत में बनने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रो क्लोरो चर्चा हो रही है।
अमेरिका ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के अलावा 30 से ज्यादा
देशों ने भारत से हाइड्रोक्सी फ्लोरो क्लीन की आपूर्ति के लिए कहा भारत दुनिया का इस दवा का उत्पादक देश है ।
एंटीमलेरियल दवा है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कोरोना की लड़ाई में कई बार गेम चेंजर बता चुके हैं।जिसकी वजह से
इसकी भारी मांग को देखते हुए भारत में दवाई के निर्यात पर पाबंदी हटाने की घोषणा करती हैं।
और इस दवाई को दुनिया में एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया
जिससे मीडिया ने तो भारत को सुपर पावर ही घोषित कर दिया था। कि कैसे भारत एक विश्व शक्ति बनकर उभरा है
आपकी जानकारी बता दे कि दुनिया भर में मेड इन इंडिया हाइड्रो क्लोरो की बढ़ती मांग के बीच वैज्ञानिक और तमाम
देशों के health expert अब कोरोनावायरस से लड़ने की इस दवा की भूमिका को खारिज करने लगे हैं।
कई वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रो फ्लोरो क्लीन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के खिलाफ आगाह भी किया है।
इस दवा का कोरोना के साथ कोई संबंध नहीं है।
हाइड्रो क्लोरोलनी का इस्तेमाल सामान्य तौर पर आर्थराइटिस लूकस और मलेरिया के उपचार में होता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने लोगों को बिना चिकित्सीय परामर्श के हाइड्रोक्लोरिक की दवा को न लेने की सलाह दी है ।
क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक की दवा लेने से खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
आईसीएमआर ने अपने एडवाइजरी में कहा है कि हाइड्रोक्लोरिक लैब स्टडी में कोरोना वायरस के संक्रमण के
खिलाफ शुरुआती बचाव में मददगार साबित हुई थी हालांकि क्लीनिकल ट्रायल में दवाई की सीमित सफलता वायरस को ठीक करने के लिए दवाई का प्रयोग सफल नहीं हुआ।
हालांकि आपको बता दें पिछले महीने इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट में प्रकाशित फ्रेंच वैज्ञानिकों की एक स्टडी में बताया गया।
कि 20 मरीजों के हाइड्रो क्लोरो क्वीन से इलाज के बाद उनमें वायरल रोड में कमी आ गई इसके अलावा बाकी मरीजों की तुलना में इस दवा का इस्तेमाल करने वालों के शरीर में वायरस ज्यादा लंबे समय तक मौजूद नहीं रहे ।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाला देते हुए ऑक्सिक्लोरो क्वीन को लगातार गेम चेंजर लेकिन।
आप स्टडी के प्रकाश को ने कहा है कि तमाम मानकों के अनुरूप नहीं है।
इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एंटीमाइक्रोबॉयल एजेंट ने इस स्टडी को लेकर तमाम सवाल खड़े किए हैं ।
अधिकारियों का कहना है कि शोधकर्ताओं ने अपने डेटा में उन मरीजों को शामिल नहीं किया था। जिन पर हाइड्रोक्लोरिक वीन ट्रीटमेंट का अच्छा असर नहीं देखने को मिला कुछ मरीजों की इस दवाई को लेने के बाद हालत और खराब हो गई और कुछ लोगों की जानें भी चली गई ।
शोधकर्ताओं ने 26 मरीजों के साथ प्रयोग की शुरुआत की लेकिन छह मरीजों को ट्रायल के बीच में छोड़ना पड़ा स्टडी के मुताबिक दल में शामिल तीन मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा।
चौथे मरीज की मौत हो गई जबकि एक मरीज को उल्टी की शिकायत होने पर हाइड्रोक्लोरिक देना बंद कर दिया।
स्वीडन में कोरोना वायरस के मरीजों में मलेरिया के दवा का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इससे मरीजों में भयानक सिर दर्द और वजन लॉस जैसी समस्याएं हो रही है।
इस दवा को देने के कुछ दिन बाद ही कई मरीजों में माइग्रेन उल्टी आंखों की रोशनी कम होने जैसे साइड इफेक्ट नजर ।
आने लगे 100 में से 50 में क्लोरीन दवा की वजह से हार्टबीट में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
हार्ट बीट बढ़ने या घटने की वजह से हार्टअटैक तक की नौबत आ सकती है। मेडिकल वेबसाइट के मुताबिक हाइड्रोक्लोरिक सिर्फ ट्रायल तक रखा गया है।
चीन और फ्रांस में शुरुआती सफलता के बावजूद यूरोपियन एजेंसी ने कहा कोरोना वायरस साबित नहीं हुई है।
वहीं ब्रिटेन ने ट्रायल खत्म ना होने तक इस दवा का इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है।
U.k प्रोफेसर एंथोनी गार्डन ने भी बताया कि अभी तक इस बात के कोई सबूत नहीं है।
कि क्लोरोक्वीन या हाइड्रोक्सी क्लोरोक्रोरीन कोरोना वायरस के इलाज में सरदार हैं या नहीं।
मिलते हैं दोस्तों अगली आर्टिकल में किसी अन्य खबर के साथ ऐसे ही कोरोना अपडेट के लिए shocking news चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और हां comment , share कर देना।
धन्यवाद।
जय हिंद जय भारत।
एक YouTube channel गरीब लड़के का है फाइनेंसियल कंडीशन घर की ठीक नहीं है इसलिए उसने अपना यूट्यूब चैनल बना रखा है तो मेरी आप सब से विनती है कि इसके चैनल में जाओ सब्सक्राइब लाइक और शेयर कर देना प्लीज।


































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