भारत जल्दी बनाएगा कोरोना का टीका

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे स्वस्थ होंगे फिट होंगे ।भगवान आपको और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें । आज हम बात करने जा रहे हैं
भारत जल्दी बनेगा को रोना का टीका।

भारत वैज्ञानिक बहुत नजदीक। जल्दी आएगा कोरोना का टीका


दुनिया का हर देश यदि की तरह टीके की खोज में लगा है। सबको उस टीका का इंतजार है। इसने कोरोनावायरस को खत्म करने में कदम हो।
ऐसे में पीएम मोदी ने देश के युवा वैज्ञानिकों से विश्व कल्याण के लिए आगे आने के लिए अनुरोध किया है।
जिसकी वजह से वैज्ञानिकों को भी हिम्मत और ऊर्जा मिली है। इसकी वजह से हमारे देश में अलग-अलग हिस्सों में शोध हो रहे हैं।
ऐसी हालत में जब देश को नहीं पता कि आखिर कब तक वैक्सीन बनकर तैयार होगा।
मुंबई से एक अच्छी खबर आई है मुंबई में एक 90 साल पुरानी दवाई पर रिसर्च करी जा रही है। और करुणा से जंग इसके अच्छे नतीजे आ रहे हैं।
मुंबई के परेल में हल्फ़विं इंस्टिट्यूट मैं इस दवाई पर रिसर्च कर रहे हैं। यह वैक्सीन यानी बेसेलर कलमतिक गोरिन । इस वैक्सीन को बनाने में 1908 से 1921 तक का समय लगा करीबन 13 साल का वक्त लगा।
फ्रेंच बैक्टरियोलिस्ट अल्बर्ट कल्मेट कल मैं कलमेट ग्रीन ने इसे बनाया था।
आप तक बीसीजी टीवी के मरीजों के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता था। नतीजे बेहतर रहे तो कोरोना वायर के खिलाफ यह वैक्सीन बड़ा हथियार बन सकता है।
कोरोना के खात्मे का वैक्सीन बनाने का काम मुंबई में भी नहीं महाराष्ट्र के पुणे के एन सी एल यानी राष्ट्रीय विज्ञान के इनोवेशन पार्क में सिविल बायो सॉल्यूशन के लिए भारत के वैज्ञानिक जुटे हैं।
भारत की सैकड़ों स्टार्टअप कंपनियां मैं से एक सीक्वल बायोसोल्यूशन को भारत सरकार और साइंस एंड टेक्नोलॉजी फंडिंग कर रही है। ताकि जल्द से जल्द कोरोना वायरस महामारी पर रोक लगा सकें।
सीक्वल बायो सलूशन के वैज्ञानिकों का दावा है कि विज्ञानिक ऐसा ऐसी बनाएंगे जो कोरोना वायरस के वायरस को इंसान के शरीर से खत्म कर देगा।
उनका कहना है कि हमारा जो एंटीवायरस है उसमें हमने सिर्फ मेजर का स्ट्रक्चर कंप्लेंट लिया है। और उसमें कोरोना वायरस का एंटी जेंट्स क्रिएशन  है।
 मैं एक प्रोटीन रहता है जो सरफेस के ऊपर कील जैसा दिखता है तो हम उसके मेजर वायरस स्ट्रक्चर लगा देंगे और वह जो एक्टिव वायरस है वह आदमी के अंदर इंजेक्ट कर देंगे तो जब इंजर्ड हो जाएगा तो वह सफेद पीसीएम  रहता है। वह एंटीबायोटिक बनाता है । और वो एंटीबायोटिक कोरोना वायरस से लड़कर कोरोना वायरस को खा लेगा।
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया वैक्सीन बनाती है।
अमेरिका की कंपनी सी ओ डी ए जी इ आई एस मिलकर वैक्सीन बना रही है जानवरों पर इसका परीक्षण हो चुका है।
स्विट्जरलैंड की कंपनी सनोफी पाश्चर के साथ भारत काम कर रहा है।
जबकि हैदराबाद में भारत बायोटेक खास वैक्सीन तैयार कर रही हैं।
इस वैक्सीन को क्लोरो क्लोरोफिल नाम दिया गया है। कंपनी ने इसका परीक्षण भी कर दिया है। कोरोना के खात्मे के लिए वैक्सीन युद्ध स्तर पर हो रहा है।
लेकिन वैज्ञानिकों की मानें तो कई टेस्ट से गुजरने के बाद 2021 से पहले वैक्सीन तैयार करना नामुमकिन है। और अगर वैक्सीन बन भी जाता है तो इतनी बड़ी तादाद में बनाना सर दर्द का काम है ।
फिलहाल तो उम्मीद पर दुनिया टिकी है। कोरोना का संकट देखते हुए भारत ने जिस तरीके से निर्णय लिया है।
वह काबिले तारीफ है। जिसकी वजह से आज पूरी दुनिया कोरोना से लड़ने के लिए भारत की तारीफ कर रहा है।
स्विट्ज़रलैंड के प्रधानमंत्री ने भी भारत की खूब तारीफ करी
है हालांकि भारत का तरीका सभी देशों से अलग था।
दरअसल स्विजरलैंड के ऑल के मैटर हॉर्न पर्वत पर भारत के तिरंगे की रोशनी की । इससे रोशनी ने करुणा से कोरोना और जज्बे को सलाम किया।

  1. 55 देशों के लिए भारत संकटमोचक बना हुआ है।

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जय हिंद जय भारत।
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