भारत चीन से यह चीज मांग रहा है लेकिन चीन देने को तैयार नहीं।
हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे फिट होंगे होंगे स्वस्थ होंगे और भगवान ऐसे ही आपके परिवार और आप पर कृपा बनाए रखें। तो आज का हमारा मुद्दा यह है कि भारत चीन से ऐसी क्या चीज मांग रहा है जो चीन देने को तैयार नहीं तो चलिए शुरू करते हैं।
इस तरह सामान के मामले में चीन अमेरिका की जगह लेकर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया ।
2018 में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए और दोनों के बीच $95.4 का व्यापार हुआ ।
चीन में भारत के राजदूत ने बताया था कि साल यानी 2019 में भारत-चीन का कारोबार कारोबार 100 billion dollar हो चुका है।
कारोबार बढ़ रहा है इसका यह मतलब नहीं है कि फायदा दोनों को बराबर हो रहा है ।
भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक 2018 में भारत-चीन के बीच 95 पॉइंट 5 4 अरब डॉलर का कारोबार हुआ ।
लेकिन इसमें भारत ने जो सामान अकाउंट किया उसकी कीमत 18.84 अरब डॉलर थी इसका मतलब यह है कि
भारत से उसने कम सामान खरीदा और 5 गुना ज्यादा समान उसे बेचा। ऐसे में चीन को फायदा हुआ इस कारोबार और
एक बड़ी बात यह है कि भारत के साथ सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है। तो वह चीन ही है भारत चीन से सामान ज्यादा खतरा है और उसके मुकाबले बेच बहुत कम रहा है ।
2018 में भारत को चीन के साथ 57 अरब डालर का व्यापार घाटा हुआ दोनों देशों के बीच व्यापारिक
संतुलन भारत के लिए सरदर्द बन गया है ।
भारत चाहता है कि वह इस व्यापार घाटे को किसी ना किसी तरीके से कम करें ।भारत ने चीन से इस बारे में बात भी की और कहा कि वह कुछ चीजों के लिए उसके बाजार में और ज्यादा पहुंच हासिल करना चाहता है।
भारत में दवाइयां बनती है और उस क्षेत्र में भारत का दुनिया भर में नाम है यानी भारत चीन को दवाइयां बचे सकता है ।आईटीसी फायदे दे सकता है इंजीनियरिंग की सेवाएं दे सकता है इसके अलावा चावल चीनी कई तरह के फल और सब्जी उत्पाउत्पाद सूती धागा और कपड़ा दे सकता है ।
व्यापार असंतुलन की इस गंभीर समस्या से निपटने की कई कोशिशें की जा चुकी है।
अब इस वक्त कोरोना वायरस के आने से हालात और खराब हो चुके हैं।
अगर बात करें दवाइयों की तो जेनरिक दवाइयां बनाने और उनके निर्यात में भारत अवल देश है।
साल 2019 में भारत ने 201 दवाएं निर्यात किया थे और उससे अरबों रुपए कमाए और
आज भी भारत इन दवाओं को बनाने के लिए चीन पर निर्भर है। चीन से एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स आयात करता है यह दवाइयां बनाने का कच्चा माल है ।
चीन में कोरोना वायरस के फैलने की वजह से आयात और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो गया है
।और एपीआई का आयात ना हो पाने की वजह से कई कंपनियां दवाओं के प्रोडक्शन में कमी हो रही है जिसका असर
आने वाले वक्त में दवाओं की वैश्विक आपूर्ति पर दिख सकता है ।आज जिन दवाइयों के डिमांड पूरी दुनिया में उन दवाइयों को बनाने के लिए करीब 85 फ़ीसदी एपीआई चीन से आयात किया जाता है ।
भारत में एपीआई का हां प्रोडक्शन और जो भारत में बनाया जाता है उसे फाइनल प्रोडक्ट बनाने की कुछ चीजें चीन से आयात की जाती है।
कि भारतीय कंपनियां अप्लाई प्रोडक्शन के लिए चीन पर निर्भर है ।
जो स्टॉक भारत में वह करीब 1 महीने तक चल सकता है अगर एक महीने के अंदर आयात शुरू नहीं हुआ। तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अब दूसरी चीज जो भारत चीन से सबसे ज्यादा इंपोर्ट करवा रहा है ।
वह कोरोना टेस्ट किट में वैज्ञानिकों की टीम रोजाना नई-नई खोजें करने में लगी है पिछले महीने वहां वैज्ञानिकों की टीम ने 29 मिनट में टेस्ट करने के लिए किट डेवलप किया।अब उसे आगे बढ़ते के लिए वैज्ञानिकोंंंं की टीम ने एक नई एंटीबॉडी टेस्टिंग किट डेवलप किया है।
इस किट में रक्त की एक बूंद डालकर कोरोना का परीक्षण किया जा सकता है। अब जब ये किट चीन दुनिया के हर देश में भेज रहा है। भारत ने भी 1000000 टेस्टिंग किट का चीन का आर्डर दिया था।
15 मार्च को लेकिन उसमें से करीब 500000 विशेष गेट भारत को मिली थी।बाकी भारत की जगह अमेरिका पहुंच गई क्योंकि वहां से अच्छा पैसा मिल रहा था। भारत ने चीन की कंपनी को जांच किट का आर्डर दिया था लेकिन निर्यातक व्यापारी ने माल को अमेरिका भेज दिया इसकी मदद से महज आधे घंटे में जांच संभव होती है।
यहां कोविद -19 रिपोर्ट जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कम टेस्टिंग संक्रमित मामलों भी कम है।
तमिलनाडु के मुख्य सचिव ने पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी को राज्य ने ₹400000 रैबिट का आर्डर दिया था।
केंद्र ने भी इस कंपनी को 500000 का आर्डर दिया है।
पहली केप चीन से भारत आने वाली थी जिसमें 50000 की तमिलनाडु की थी । लेकिन निर्यातक व्यापारी ने भारत का माला भेजकर अमेरिका भेज दिया था।अच्छा मिल रहा था इसके अलावा चीन ने भारत सरकार को 170000 पीपी ए दिए हैं भारत के पास पहले से ही 200000 पीपी ई है । चीन से मिली मदद के बाद घरेलू की संख्या बढ़ कर 190000 तक पहुंच गई है इन को अस्पतालों दिया जाएगा ।इसके
अलावा भारत को दो लाख n95 मस्क मुहैया करवाए हैं इससे पहले सरकार ने 20 लाख से ज्यादा एंड चीन बॉर्डर दिए हैं
फिलहाल 1600000 n95 मस्क सरकार के पास आ चुके हैं।
साथ ही N95 mask ऑर्डर सिंगापुर की कंपनी को दिया जा चुका है। जो कि 15 अप्रैल आना शुरू हो जाएंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के कई राज्यों p p a की कमी को लेकर अपनी चिंता जता चुके है।
चीन से मिले सामान से स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकेगा।
बता देते इसमें कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
अगर ऐसी तेजी से संख्या बढ़ती गई तो भारत का हाल भी इटली जैसे हालात का सामना करना सकता है ।
मिलते हैं दोस्तों अगले आर्टिकल में कोरोना अपडेट के लिए शॉकिंग न्यूज़ को सब्सक्राइब करें कमेंट करें शेयर करें ब्लॉग में नए आया हो तो सब्सक्राइब जरूर करें शॉकिंग न्यूज़ को।
धन्यवाद
जय हिंद जय भारत।
भारत चीन से मांग रहा ये चीज लेकिन चीन देने को तैयार नहीं
भारत और चीन के बीच कारोबार में किस तरह बढ़ोतरी हुई है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि से सदी की शुरूआत हो यानी साल 2000 में दोनों देशों के बीच का कारोबार केवल $3000000000 का था जो 2008 में बढ़कर 51 पॉइंट 8 अरब डालर का हो गया।इस तरह सामान के मामले में चीन अमेरिका की जगह लेकर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया ।
2018 में दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए और दोनों के बीच $95.4 का व्यापार हुआ ।
चीन में भारत के राजदूत ने बताया था कि साल यानी 2019 में भारत-चीन का कारोबार कारोबार 100 billion dollar हो चुका है।
कारोबार बढ़ रहा है इसका यह मतलब नहीं है कि फायदा दोनों को बराबर हो रहा है ।
भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक 2018 में भारत-चीन के बीच 95 पॉइंट 5 4 अरब डॉलर का कारोबार हुआ ।
लेकिन इसमें भारत ने जो सामान अकाउंट किया उसकी कीमत 18.84 अरब डॉलर थी इसका मतलब यह है कि
भारत से उसने कम सामान खरीदा और 5 गुना ज्यादा समान उसे बेचा। ऐसे में चीन को फायदा हुआ इस कारोबार और
एक बड़ी बात यह है कि भारत के साथ सबसे ज्यादा घाटा हो रहा है। तो वह चीन ही है भारत चीन से सामान ज्यादा खतरा है और उसके मुकाबले बेच बहुत कम रहा है ।
2018 में भारत को चीन के साथ 57 अरब डालर का व्यापार घाटा हुआ दोनों देशों के बीच व्यापारिक
संतुलन भारत के लिए सरदर्द बन गया है ।
भारत चाहता है कि वह इस व्यापार घाटे को किसी ना किसी तरीके से कम करें ।भारत ने चीन से इस बारे में बात भी की और कहा कि वह कुछ चीजों के लिए उसके बाजार में और ज्यादा पहुंच हासिल करना चाहता है।
भारत में दवाइयां बनती है और उस क्षेत्र में भारत का दुनिया भर में नाम है यानी भारत चीन को दवाइयां बचे सकता है ।आईटीसी फायदे दे सकता है इंजीनियरिंग की सेवाएं दे सकता है इसके अलावा चावल चीनी कई तरह के फल और सब्जी उत्पाउत्पाद सूती धागा और कपड़ा दे सकता है ।
व्यापार असंतुलन की इस गंभीर समस्या से निपटने की कई कोशिशें की जा चुकी है।
अब इस वक्त कोरोना वायरस के आने से हालात और खराब हो चुके हैं।
अगर बात करें दवाइयों की तो जेनरिक दवाइयां बनाने और उनके निर्यात में भारत अवल देश है।
साल 2019 में भारत ने 201 दवाएं निर्यात किया थे और उससे अरबों रुपए कमाए और
आज भी भारत इन दवाओं को बनाने के लिए चीन पर निर्भर है। चीन से एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स आयात करता है यह दवाइयां बनाने का कच्चा माल है ।
चीन में कोरोना वायरस के फैलने की वजह से आयात और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो गया है
।और एपीआई का आयात ना हो पाने की वजह से कई कंपनियां दवाओं के प्रोडक्शन में कमी हो रही है जिसका असर
आने वाले वक्त में दवाओं की वैश्विक आपूर्ति पर दिख सकता है ।आज जिन दवाइयों के डिमांड पूरी दुनिया में उन दवाइयों को बनाने के लिए करीब 85 फ़ीसदी एपीआई चीन से आयात किया जाता है ।
भारत में एपीआई का हां प्रोडक्शन और जो भारत में बनाया जाता है उसे फाइनल प्रोडक्ट बनाने की कुछ चीजें चीन से आयात की जाती है।
कि भारतीय कंपनियां अप्लाई प्रोडक्शन के लिए चीन पर निर्भर है ।
जो स्टॉक भारत में वह करीब 1 महीने तक चल सकता है अगर एक महीने के अंदर आयात शुरू नहीं हुआ। तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अब दूसरी चीज जो भारत चीन से सबसे ज्यादा इंपोर्ट करवा रहा है ।
वह कोरोना टेस्ट किट में वैज्ञानिकों की टीम रोजाना नई-नई खोजें करने में लगी है पिछले महीने वहां वैज्ञानिकों की टीम ने 29 मिनट में टेस्ट करने के लिए किट डेवलप किया।अब उसे आगे बढ़ते के लिए वैज्ञानिकोंंंं की टीम ने एक नई एंटीबॉडी टेस्टिंग किट डेवलप किया है।
इस किट में रक्त की एक बूंद डालकर कोरोना का परीक्षण किया जा सकता है। अब जब ये किट चीन दुनिया के हर देश में भेज रहा है। भारत ने भी 1000000 टेस्टिंग किट का चीन का आर्डर दिया था।
15 मार्च को लेकिन उसमें से करीब 500000 विशेष गेट भारत को मिली थी।बाकी भारत की जगह अमेरिका पहुंच गई क्योंकि वहां से अच्छा पैसा मिल रहा था। भारत ने चीन की कंपनी को जांच किट का आर्डर दिया था लेकिन निर्यातक व्यापारी ने माल को अमेरिका भेज दिया इसकी मदद से महज आधे घंटे में जांच संभव होती है।
यहां कोविद -19 रिपोर्ट जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कम टेस्टिंग संक्रमित मामलों भी कम है।
तमिलनाडु के मुख्य सचिव ने पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी को राज्य ने ₹400000 रैबिट का आर्डर दिया था।
केंद्र ने भी इस कंपनी को 500000 का आर्डर दिया है।
पहली केप चीन से भारत आने वाली थी जिसमें 50000 की तमिलनाडु की थी । लेकिन निर्यातक व्यापारी ने भारत का माला भेजकर अमेरिका भेज दिया था।अच्छा मिल रहा था इसके अलावा चीन ने भारत सरकार को 170000 पीपी ए दिए हैं भारत के पास पहले से ही 200000 पीपी ई है । चीन से मिली मदद के बाद घरेलू की संख्या बढ़ कर 190000 तक पहुंच गई है इन को अस्पतालों दिया जाएगा ।इसके
अलावा भारत को दो लाख n95 मस्क मुहैया करवाए हैं इससे पहले सरकार ने 20 लाख से ज्यादा एंड चीन बॉर्डर दिए हैं
फिलहाल 1600000 n95 मस्क सरकार के पास आ चुके हैं।
साथ ही N95 mask ऑर्डर सिंगापुर की कंपनी को दिया जा चुका है। जो कि 15 अप्रैल आना शुरू हो जाएंगे।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश के कई राज्यों p p a की कमी को लेकर अपनी चिंता जता चुके है।
चीन से मिले सामान से स्थिति पर नियंत्रण किया जा सकेगा।
बता देते इसमें कोरोना वायरस का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
अगर ऐसी तेजी से संख्या बढ़ती गई तो भारत का हाल भी इटली जैसे हालात का सामना करना सकता है ।
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जय हिंद जय भारत।


































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