चीन मैं सामान इतना सस्ता क्यों है

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे फिट होंगे होंगे स्वस्थ होंगे और भगवान ऐसे ही आपके परिवार और आप पर कृपा बनाए रखें तो आज का हमारा मुद्दा है की चीन का प्रोडक्ट इतना सस्ता क्यों है।

चीन का प्रोडक्ट भारत में सस्ते क्यों है


https://youtu.be/VvBsMnI3yT8
आप भारत में कहीं पर भी चले जाए हर जगह आपको मेड इन इंडिया से ज्यादा मेड इन चाइना के प्रोडक्ट देखने को मिल जाएंगे जिसमें खिलौनों और बड़े मशीन कुछ मेड इन चाइना का ही दिखेगा।

 इससे उल्टा चाइना में कहीं पर चले जाओ बहुत कुछ ही प्रोडक्ट ऐसे  मिलेंगे जो मेड इन इंडिया लिखेंगे होंगे। मेड चाइना मेड इन चाइना  कि भारत के बाजारों में उनके दिए हैं प्रोडक्ट ज्यादा बिकते हैंऔर उनके बाजारों में हमारे प्रोडक्ट देखना भी नसीब भी नहीं होते हैं  है।
तो अब सवाल यह है कि उनको प्रोडक्ट इतना यूज क्यों होता है। क्यों कि वहां सस्ता है तो उनके प्रोडक्ट का कितना यूज क्यों होता हैं। कुछ लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि भारत में सस्ते प्रोडक्ट क्यों नहीं बना पाता तो चलिए आज हम इसकी जड़ को समझने की कोशिश करता है ।
और भारत में सस्ते प्रोडक्ट क्यों नहीं बना सकता और इसकी कुछ ऐसे इंटरेस्टिंग फैक्ट बताएंगे जो आपने पहले नहीं सुनेंगे।

दोस्तों से पहले हम demand-supply का फंडा समझाते  किसी चीज को बिजनेस उसका डिमांड से ही  होता है ।

यह चीनी ऐसे हैं कि पहले उसकी डिमांड बनाते हैं कि मान लीजिए कोरोनावायरस जो आजल चल रहा है।
   इस तरह इसको फैलाया गया सारी दुनिया में दुनिया भर को कोरोनावायरस जैसी महामारी की मुसीबत में झोंक देने वाला
चीन अब उसी के माध्यम से नोट छापने रहा है उसके बचाव के लिए चीन दुनिया के कई देशों को मास्क का निर्यात कर रहा है ।

और उसके लिए धंधा बहुत फायदाआलमपुरा चीन में जैसे कोरोना वायरस के संक्रमण का मामला कम हुआ।
तो चीन ने इटली स्पेन समेत दुनिया के कई देशों में मास्क का निर्यात करना शुरू कर दिया जो चीन से भी ज्यादा बुरी तरह से इस बार से प्रभावित हुए भारी मांग को देखते हुए इस साल के पहले 2 महीने के भीतर ही चीन की 9000 कंपनी ने मास्क बनाने का काम शुरू कर दीया है।


 चीन के मुताबिक देश में 11.6 करोड़ इस समय देश में 11 पॉइंट 6 करोड़ मास का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। वही इस बीच मैंने पर नकली मास्क निर्यात करने के आरोप भी लग रहे ऐसी अन्य चीजें जैसे
अन्य चीजें कारोना testing kid
वेंटीलेटर PPwe kid औरअन्य मेडिकल उपकरण यह पूरी दुनिया में सप्लाई करना है ।

जब इटली में त्राहि त्राहि मच गई सारी तरफ वह अपील करता कि कि मुझे कोई किट दे दो मुझे कोई वेंटीलेटर दे भेजो मुझे



कोई रेस्पैटर  दे दो। तो कोई यूरोपियन देश आगे नहीं आया लेकिन चीन ने क्या किया चाइना ने पब्लिकली कमेंट किया 1000 मिनट लेटर  तो मिलना एक लाख रेस्पिरेटरी 20000 प्रोटेक्टिव सूट और 50,000 टेस्ट किट और यह करते ही पूरी इटली में चीन की वाहवाही हो गई।

 दोस्तोंंंं आपको बता दूं। दुनिया की बड़ी-बड़ी इकोनामी वाले देश मैं सबसे कम पैसों में लेबर मिल जाते हैं।
यताना और श्रीलंका
जैसे देशों में लेबर को चाइना की लेबर को से 30% कम है लेकिन इनकी ओर चाइना कि  लेबर  में काफी डिफरेंस है बीते कुछ सालों में लेबर कॉस्ट पहले से 15% बढ़ गई है।
प्रोडक्टिविटीी ग्रोथ चाइना की बात करें तो दुनिया के सभी देशों मैंं चाइना साल 2017 से आगे है। 1990 से लेकर 2000 तक आप उनकी एवरेज ग्रोथ 2.8% थी।

जबकि यूएसए 0.5% और जापान की 0.2 %प्रतिशत थी आप इनके प्रोडक्टट इतनी अच्छी क्यों है क्योंकि उनके पास
बड़ा फायदा है कििि उसके पास रॉ मेटेरियल डॉमेस्टिक लेवल पर मिल जाता है यानी अपने देश में मिल जातेे हैं इसका बेस्ट एग्जांपल है
electronic कंपोनेंट।
अगला है कॉम्पिटीज प्राइसिंग इसको भी इसको भी चाइना लो प्राइस में एफर्ट कर सकता है क्योंकि उसको प्रोडक्ट का इनोवेशन या प्रोडक्ट की r&w खर्च नहीं करना पड़ता।
 इसकेेे दो रीजन  है। पहला चाइना ज्यादातर वह प्रोडक्ट बनाता है जी बन चुकी है यानी पहले से बनी जिसमें सिर्फ प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरर का खर्चा आ जाता है ।
दूसरा कारण चाइना के पास आईपीआर का अभाव है यानी चाइना नए प्रोडक्ट की कॉपी करने में अव्वल नंबर पर है जो पूरी दुनिया को पता है।
फॉर एग्जांपल अगर एडीडास कंपनी अपने प्रोडक्ट दुनिया में कहीं पर भी लॉन्च करती है तो चाइना जल्दी कॉपी करने में लग जाते हैं मतलबी ज्यादातर प्रोडक्ट की डुप्लीकेट प्रोडक्ट चाइना मैं ही बनते हैं।
प्रोडक्ट सस्ता बेचनेेे के लिए भारी मात्रा में उत्पादन करना पड़ता है और जब भारी मात्रा में उसका उत्पादन होगा ।तो उसका खर्चा भी कम आएगा जिससे प्रोडक्ट भी सस्ता हो जाएगा ।

और उनका दूसरा तरीका है डंपिंग स्ट्रेटजी तो चीन डंपिंग से ही काम करता है डंपिंग का मतलब होता है चाइना का व्यापारी का प्रोडक्ट मैन्यूफैक्चर प्रोडक्ट से दूसरे देश में एक्सपोर्ट करते हैं और उसका भाव लोकल मार्केट से कम रखते हैं।
डंपिंग  स्ट्रेटजी मतलब मार्केेेट में कब्जा करना या तो मार्केट को तोड़ देना जो चाइना को बेहतर तरीके से आता है।
तो अब भारत को आगे आने के लिए क्या करना चाहिए
देश केेेे कुछ बड़े बड़े अर्थशास्त्र का मुताबिक rules को सिंपल करना पड़ेगा यानी कि कमर्शियल बिजनेस को आसान

बनाना पड़ेगा मैन्यूफैक्चर एग्रीकल्चरलिस्ट सुधार लाने होंगे
लेबर को नई नई स्किल सिखा होगी यानी उसे मल्टी स्पेशलिस्ट बनाना पड़ेग। एक्सपोर्ट को इंप्रूव करना  पड़ेगा।
सबसे सिंपल बाद उनके Chinese प्रोडक्ट को खरीदना बंद कर दो। अपने आप ही भारत उससे आगे निकल जाएगा।
जिन पैसों से आप उनका प्रोडक्ट खरीदते हैं उन्हीं पैसों से वह हथियार बनाते हैं और
भारत के सिपाहियों को मौत होती हैं। तो यह था आज का ज्ञान अगर आर्टिकल अच्छा लगे तो सब्सक्राइब करना शॉकिंग न्यूज़ को और शेयर करना और कमेंट करना ।आपका क्या कहना है कमेंट करके बताएं इस बारे में। ब्लॉक पर नए आए हो तो शॉकिंग न्यूज़ को सब्सक्राइब कर दो ताकि आपको लेटेस्ट अपडेट मिले दुनिया के बारे में हमारे वहां मिलेगी।
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जय हिंद जय भारत।



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