मोदी जी के सामने यह 5 संकट ,नहीं समझे तो करोना होगा घातक
हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे स्वस्थ होंगे फिट होंगे ।भगवान आपको और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें । आज हम बात करने जा रहे हैं
मोदी जी के सामने ये 5 संकट नहीं समझे तो कोरोना होगा घातक।
दोस्तों आज कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में लोग डाउन चल रहा है। वहीं भारत में सबसे बड़े संकट है जो सामने आ रहे हैं। आज हम उस पर बात करेंगे क्या हर जगह लोग डाउन से लोग संतुष्ट हैं।
दिल्ली में करीबन 300000 जुग्गी है। कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीरी पीड़ितों के लिए कैंप है। रेन बसेरा है साथ ही फ्लाईओवर के नीचे लोग सोते हैं।
2015 में करीबन 3500000 लोग रहते हैं 2020 में यह आंकड़ा बीजेपी ने 5000000 बताया। यह आंकड़े केवल दिल्ली है।
लगभग सभी नगरों में यहां पर अधिकतर हैंड टो माउथ है। वह इंसान जिनके पास जीविका और जीने के लिए पैसे नहीं होता कपड़ा नहीं होता। जो अपनी दैनिक कार्य के कारण कमाई करते हैं।
ऐसे लोग 50 से 70 करोड़ों है। दोस्तों ये वह लोग हैं जो दिनभर कमा कर उसी से अपना रोज खर्चा चलाते हैं।
हालांकि दिल्ली सरकार कह रही है कि हम रोज 800000 लोगों को खाना खिला रहे हैं जो को देखकर पर्याप्त नहीं लग रहा है।
सरकारी योजना का गरीबों को कितना फायदा मिलता है हम सभी परिचित हैं। सुबह लाइन लगते हैं शाम को नंबर आता है।
50 लाख लोगों में से 500000 लाख लोगों को इस्कॉन मंदिर खाना दे रहा है। बाकी समाज संगठन और गुरुद्वारा और बाकी 42 लाख लोगों को खाने की पर्याप्त व्यवस्था हुई है या नहीं इसकी जानकारी मीडिया ने छुपा रखी है। दिल्ली जैसी
कोरोना के जो भूख की परेशानी है। दिल्ली जैसी राजधानी में अगर पर्याप्त प्रबंध कर भी लिए। लेकिन बाकी शहरों का क्या हाल है आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि
दिल्ली के अलावा भारत में 600000 से अधिक गांव है। जिनकी खबर आपको मिडिया नहीं बता रहा है।
जिनके बैंक में खाते नहीं हैं या जिनके बैंक का खाता लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है उनका क्या हालत हो रही होगी।किसानों को उनकी कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं इसको कोरोना वायरस ने संसार को ऐसा काटा है ।कि ₹100 कमाने वाला मजदूर आज सरकार पर अपनी जीविका के लिए निर्भर है।
भारत सरकार के आयुष्मान मंत्रालय का कहना है कि दिन में सिर्फ एक चम्मच चमनपरास लेना है। 150ml दूध में हल्दी एक बार तुलसी दालचीनऔर मुनक्का से बना हुआ एक बार काढ़ा पीना है। पूरे दिन में एक बार तब आप की इम्यूनिटी बढ़ाएगा।
जिस क्षेत्र में आहार इंसान के लिए आहार की कमी हो फल की कमी हो वह इन नियमों का पालन करके वह अपनी ईमेल आईडी को कैसे बनाएगा। वहां तो लोग नमक से रोटी खा रहे हैं कोई अचार से रोटी खा रहा है। भारत में इस वक्त अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने की वच्छता से जीवन व्यक्त करने की।
कोरोना का कहर गरीब इंसान के लिए मौत से कम नहीं आने वाले टाइम पर नौकरी जाने का डर इस डूबती हुई अर्थव्यवस्था मैं कोरोना से भी मुश्किल वक्त लेना का समय है।
कोरोना वायरस की वजह से जिस वक्त देश में लाखों लोग घरों में हैं और वह ऑनलाइन डिलीवरी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
और घर मैं बैठे मनचाही चीजें पा रहे हैं। ऐसे वक्त में देश में करोड़ों लोग रोड पर हैं उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है।
3 मई को लॉग डॉन खुलता है या नहीं इसका कोई पता नहीं।
इशारा नहीं मिल रहा है कोरोनावायरस के भारत पहुंचने से देश की अर्थव्यवस्था चिंताजनक थी। कभी दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की विकास दर बीते 4 साल में 4.7 रही।
बीते 6 सालों में सबसे निचला स्तर था। साल 2019 में भारत में बेरोजगारी 35 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ गई थी। और पिछले साल देश 8 प्रमुख स्तन मैं औद्योगिक उत्पाद 5.2 फ़ीसदी तक गिर गया।
बीते 14 सालों में सबसे खराब स्थिति है कम शब्दों में कहें तो भारत की आर्थिक स्थिति पहले से भी खराब है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस के प्रभाव से लोगों के स्वास्थ्य में संघट छाया है तो दूसरी ओर पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और बड़ा झटका में सकता है।
लॉन्ग डॉन के वक्त अब अतिरिक्त मुक्त राशन देने की घोषणा की गई है। गरीब लोग उस तक कैसे पहुंच पाएंगे सरकार को सेना और राज्य की मदद से गरीबों तक खाने की चीजें हो जानी चाहिए। कॉविड -19 का संक्रमण ऐसे वक्त में फैला है।
जब भारत की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के 2016 की नोट बंदी के फैसले अर्थव्यवस्था की सुस्ती को भरने के लिए करा गया था। नोटबंदी की वजह से सरकार काला धन लाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन भारत जैसा छोटे-मोटे कारोबारी जिनका काम पेमेंट से होता है।
इस फैसले से उनकी कमर टूट गई। बात करें बेरोजगारी की दो विशेषज्ञ इस बात के लिए भी चेतावनी दे रहे हैं कि भारत में बेरोजगारी बढ़ने के पूरे आसार हैं। बड़ी संख्या में फैक्ट्री बंद होने से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
भारत में बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है। और अगर यही स्थिति जारी रहती है तो और संगठन क्षेत्र में काम करने वालों को बड़ी मुश्किल है। झेलनी पड़ेगी छोटे कारोबारी काम करने वाले लोग या तो कम पैसों में काम करने में मजबूर होंगे। या तो उनकी नौकरी छिन जाएंगी।
बंद का असर एविएशन पर भी पड़ा है। कापा ( सेंटर फॉर एंबीशन)।
के मुताबिक करीबन 4 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। सर हॉस्पिटल और टू रिसेप्टर पर पड़ सकता है। देश में होटल और रेस्टुरेंट चैन पर भी असर पड़ा है।
और कई महीने तक सन्नाटा छाने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को सैलरी ना मिलने का संकट सदा रहा है । बंद की वजह से ऑटो इंडस्ट्री भी बहुत प्रभावित हुई है।$2 का अनुमानित नुकसान झेलना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए राहत भरा पैकेज देश के लिए घोषणा हरि है । वह देश का एक परसेंट जीडीपी है। सिंगापुर चाइना और अमेरिका के मुकाबले यह जीडीपी ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।
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जय हिंद जय भारत।
ऐसे लोग 50 से 70 करोड़ों है। दोस्तों ये वह लोग हैं जो दिनभर कमा कर उसी से अपना रोज खर्चा चलाते हैं।
हालांकि दिल्ली सरकार कह रही है कि हम रोज 800000 लोगों को खाना खिला रहे हैं जो को देखकर पर्याप्त नहीं लग रहा है।
सरकारी योजना का गरीबों को कितना फायदा मिलता है हम सभी परिचित हैं। सुबह लाइन लगते हैं शाम को नंबर आता है।
50 लाख लोगों में से 500000 लाख लोगों को इस्कॉन मंदिर खाना दे रहा है। बाकी समाज संगठन और गुरुद्वारा और बाकी 42 लाख लोगों को खाने की पर्याप्त व्यवस्था हुई है या नहीं इसकी जानकारी मीडिया ने छुपा रखी है। दिल्ली जैसी
कोरोना के जो भूख की परेशानी है। दिल्ली जैसी राजधानी में अगर पर्याप्त प्रबंध कर भी लिए। लेकिन बाकी शहरों का क्या हाल है आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि
- जब सरकार ने इन गरीबों के खाते में ₹500 डाले वह एक और मुसीबत बनकर उभरी की बैंक वहां उपलब्ध ना होने की वजह से लोगों को 40 किलोमीटर पैदल ही ₹500 निकालने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
जिनके बैंक में खाते नहीं हैं या जिनके बैंक का खाता लंबे समय से बंद पड़ा हुआ है उनका क्या हालत हो रही होगी।किसानों को उनकी कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं इसको कोरोना वायरस ने संसार को ऐसा काटा है ।कि ₹100 कमाने वाला मजदूर आज सरकार पर अपनी जीविका के लिए निर्भर है।
भारत सरकार के आयुष्मान मंत्रालय का कहना है कि दिन में सिर्फ एक चम्मच चमनपरास लेना है। 150ml दूध में हल्दी एक बार तुलसी दालचीनऔर मुनक्का से बना हुआ एक बार काढ़ा पीना है। पूरे दिन में एक बार तब आप की इम्यूनिटी बढ़ाएगा।
जिस क्षेत्र में आहार इंसान के लिए आहार की कमी हो फल की कमी हो वह इन नियमों का पालन करके वह अपनी ईमेल आईडी को कैसे बनाएगा। वहां तो लोग नमक से रोटी खा रहे हैं कोई अचार से रोटी खा रहा है। भारत में इस वक्त अपनी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने की वच्छता से जीवन व्यक्त करने की।
कोरोना का कहर गरीब इंसान के लिए मौत से कम नहीं आने वाले टाइम पर नौकरी जाने का डर इस डूबती हुई अर्थव्यवस्था मैं कोरोना से भी मुश्किल वक्त लेना का समय है।
कोरोना वायरस की वजह से जिस वक्त देश में लाखों लोग घरों में हैं और वह ऑनलाइन डिलीवरी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
और घर मैं बैठे मनचाही चीजें पा रहे हैं। ऐसे वक्त में देश में करोड़ों लोग रोड पर हैं उनके सामने रोजी-रोटी का संकट है।
3 मई को लॉग डॉन खुलता है या नहीं इसका कोई पता नहीं।
इशारा नहीं मिल रहा है कोरोनावायरस के भारत पहुंचने से देश की अर्थव्यवस्था चिंताजनक थी। कभी दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की विकास दर बीते 4 साल में 4.7 रही।
बीते 6 सालों में सबसे निचला स्तर था। साल 2019 में भारत में बेरोजगारी 35 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ गई थी। और पिछले साल देश 8 प्रमुख स्तन मैं औद्योगिक उत्पाद 5.2 फ़ीसदी तक गिर गया।
बीते 14 सालों में सबसे खराब स्थिति है कम शब्दों में कहें तो भारत की आर्थिक स्थिति पहले से भी खराब है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस के प्रभाव से लोगों के स्वास्थ्य में संघट छाया है तो दूसरी ओर पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था को और बड़ा झटका में सकता है।
लॉन्ग डॉन के वक्त अब अतिरिक्त मुक्त राशन देने की घोषणा की गई है। गरीब लोग उस तक कैसे पहुंच पाएंगे सरकार को सेना और राज्य की मदद से गरीबों तक खाने की चीजें हो जानी चाहिए। कॉविड -19 का संक्रमण ऐसे वक्त में फैला है।
जब भारत की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार के 2016 की नोट बंदी के फैसले अर्थव्यवस्था की सुस्ती को भरने के लिए करा गया था। नोटबंदी की वजह से सरकार काला धन लाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन भारत जैसा छोटे-मोटे कारोबारी जिनका काम पेमेंट से होता है।
इस फैसले से उनकी कमर टूट गई। बात करें बेरोजगारी की दो विशेषज्ञ इस बात के लिए भी चेतावनी दे रहे हैं कि भारत में बेरोजगारी बढ़ने के पूरे आसार हैं। बड़ी संख्या में फैक्ट्री बंद होने से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
भारत में बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है। और अगर यही स्थिति जारी रहती है तो और संगठन क्षेत्र में काम करने वालों को बड़ी मुश्किल है। झेलनी पड़ेगी छोटे कारोबारी काम करने वाले लोग या तो कम पैसों में काम करने में मजबूर होंगे। या तो उनकी नौकरी छिन जाएंगी।
बंद का असर एविएशन पर भी पड़ा है। कापा ( सेंटर फॉर एंबीशन)।
के मुताबिक करीबन 4 अरब डॉलर का नुकसान हो रहा है। सर हॉस्पिटल और टू रिसेप्टर पर पड़ सकता है। देश में होटल और रेस्टुरेंट चैन पर भी असर पड़ा है।
और कई महीने तक सन्नाटा छाने की वजह से बड़ी संख्या में लोगों को सैलरी ना मिलने का संकट सदा रहा है । बंद की वजह से ऑटो इंडस्ट्री भी बहुत प्रभावित हुई है।$2 का अनुमानित नुकसान झेलना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए राहत भरा पैकेज देश के लिए घोषणा हरि है । वह देश का एक परसेंट जीडीपी है। सिंगापुर चाइना और अमेरिका के मुकाबले यह जीडीपी ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है।
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धन्यवाद।
जय हिंद जय भारत।










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