3 मई को खत्म होगा लॉकडाउन लेकिन रहेंगी कुछ शर्तें।

हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे स्वस्थ होंगे फिट होंगे ।भगवान आपको और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें । आज हम बात करने जा रहे हैं

3 मई को खत्म होगा लॉकलॉडाउन लेकिन रहेगी कुछ शर्तें

कोरोना  को लेकर आज हम आप के लिए लेकर आए हैं 3 बड़ी खबरें।

पहली खबर है


लॉन्ग गाउन को लेकर मोदी सरकार अपनी नीतियों और फैसलों के लिए जानी जाती है। और कोरोना वायरस से अपने देश को बचाने के लिए सरकार लगातार एक के बाद एक कदम उठाए हैं।
ऐसे में हर देशवासी के मन में सवाल है कि क्या मोदी सरकार लॉन्ग गाउन को आगे बढ़ा सकती है या फिर लॉक डाउन को खत्म कर देगी ।

लेकिन इस बीच एक बड़ी खबर आ रही है। मोदी सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए एक मास्टर प्लान बना रखा है चलिए जानते हैं कि वह मास्टरप्लेन क्या हो सकता है हमारी संभावना में ।
सभी नागरिकों को सोशल डिस्टेंस का पाठ पढ़ाया जाएगा। नागरिकों को मस्क और सोशल डिस्टेंसिंग इन लोगों की लाइफ स्टाइल में जोड़ी जाएंगी। रोजमर्रा की चीजों में अनिवार्य बनाया जाएगा।
अगर कोई नागरिक मस्क के नहीं लगाता है तो उस पर भारी जुर्माना डाला जाएगा।

कोरोना के प्रकोप को देखते हुए मोदी सरकार ट्रेन और हवाई यात्रा खुलने के मूड में नहीं नजर आ रही है। माना जा रहा है कि इसमें बाद में विचार कर जाएगा। नागरिकों को घर से बाहर निकलने की झूठ तो मिलेगी ।लेकिन सभी नागरिक एक बात का ध्यान रखना होगा कि उन्हें मास्क लगाना ही होगा।

मोदी सरकार ने 3 मई के बाद सरकारी दफ्तर खुलेगी लेकिन इस दौरान ऑफिस आने वाले लोगों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा दबाव डाला जाएगा।

मोदी सरकार लोगों को शादी समारोह और धार्मिक चीजों के लिए राहत देते हुए नजर नहीं आ रही है।

3 मई के बाद जैसे मुंबई दिल्ली नोएडा जैसे क्षेत्रों में इलाकों में सरकार की खासी नजर रहेगी। यानी की माना जा रहा है कि मोदी सरकार 3 मई के बाद लॉक डाउन को धीरे-धीरे हटाएंगे।
और सरकार अलग-अलग तरीको से ढील देगी । इसकी वजह
यह है की सरकार इस दौरान रेड और ऑरेंज जॉन वाले इलाके में किसी भी तरह की छूट नहीं देगी।
जैसे-जैसे इन क्षेत्रों में कोरोना का प्रकोप खत्म होगा। और जब स्थिति में सुधार होगा तब जाकर सरकार लोगों को निहायत दे सकती है। फिलहाल ऐसे तमाम आकलन है जिसका सभी को इंतजार है। सरकार के अगले फैसले का कि वह 3 मई के बाद लॉक डाउन  पर क्या फैसला लेती है।
                       दूसरी खबर

  कोरोना बीमारी  इलाज को लेकर आ रही है। चीन के डॉक्टरों ने ढूंढा है ।एक रामबाण  इसे कहते हैं प्लाज्मा थेरेपी आइए समझते हैं।


कोरोना वायरस ने अभी तक 191000 लोगों की जान ले चुके हैं। एक लाख से ज्यादा लोग इससे ग्रसित हैं। इसका ऐलान छोड़ने के लिए चीन के डॉक्टर जल्दी-जल्दी में।


अब उनके सामने आए प्लाज्मा थेराप जिससे कई लोग रिकवर हो चुका है।
यानी कि ठीक हो चुके हैं वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन जिसे हम विश्व स्वास्थ संगठन के नाम से जानते हैं उनका कहना है।

उसने भी कहा है कि प्लाज्मा थेरेपी इस्तेमाल की जा सकती है। आप समझते हैं कि प्लाज्मा थेरेपी होती क्या है कोरोना वायरस में जिस पेशेंट जिस पेशेंट ने रिकवर कर लिया होता है। यानी कि कुकुर ना मेरे से रिकवर हो जाता है।

उससे उसके खून का प्लाज्मा दिया जाता है। जिसे हम ब्लड प्लाजमा भी मिलते हैं यानी कि हम देखते हैं पेशन को कोई और बीमारी तो नहीं जैसे ऐपेटाइज बी या सी। उसके बाद यह प्लाज्मा ऐसे पेशेंट को इंजेक्ट करा जाता है ।
जिसको उस वक्त कोरोना वायरस इंफेक्शन हो।अब इसमें एक बात बहुत जरूरी है कि यह प्लाज्मा थेरेपी तभी काम आ सकती है जब उस पेशेंट की प्रतिरोधक क्षमता एक लेबल पर हो। जिसके बाद इस इंजेक्शन से यानी की प्रार्थना थेरेपी से उसकी यूनिटी सिस्टम और बूस्ट हो सके।
आप जो यह प्लाज्मा है इसमें क्या होता है इसमें क्या होता है कि जो पेशेंट है उसकी पेशेंट की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। जो पेशेंट कोरोना वायरस से ग्रसित हो चुका है और रिकवर भी हो चुका है ।यानी कि जो इस वायरस से ठीक हो चुका है।
आप समझते हैं कि प्लाज्मा थेरेपी काम कैसे करती है। ऐसा पेशेंट जिसने कोरोना वायरस से फाइट कराओ यानी कि वह ठीक हो गया हो। जो कि ठीक हो गया हो कोरोना वायरस के इंफेक्शन के बाद।
उसकी बॉडी में ऐसे एंटीबॉडी होंगे जिन्होंने इस वायरस से लड़ा होगा। ऐसे  रेकवर पेशेंट के उसमें ना कोई एंटीबोटिक होती है। लेकिन हाइपर न्यू होते हैं जो की एंटीबायोटिक पर खट्टा कर लेते हैं।
तो जब ऐसा प्लाज्मा दूसरी बॉडी में डाला जाता है तो जो इंसान उस समय इंफेक्शन से लड़ रहा हो उसकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। उसके बदन में एंटीबॉडी होने की वजह से वह कोरोना वायरस से बेहतर तरीके से लड़ सकता है।

लेकिन यह हर वक्त सक्सेसफुल नहीं होती लेकिन इसके रिजल्ट बहुत इंक्रीजिंग है। यानी कि बहुत सारे पेशेंट ने प्लाज्मा थेरेपी देने के बाद बहुत से लोग भी खबर भी हुए हैं।
और घर जा सके हैं।
भारत में चीन के राजदूत ने कहां की हुबह और वुहान गए और वहां को छोड़ दिया जाए तो चीन केऔर जगहों पर कोरोना वायरस की पेशेंट कम हो रहे हैं। यानी कि यह यह बीमारी कम हो रही है।
बात करें हबाई गए और वहान की तो वहां चिंता का माहौल है। क्योंकि 99% पॉपुलेशन कोरोना से ग्रस्त है। बात करें दूसरी तरफ तो डायमंड प्रिंसेस क्रू की बात करें तो वहां जापान के डॉक्ट है। जिसमें भारत के 160 यात्री फंसे हुए हैं और वहां भी हालत ठीक नहीं है।
क्योंकि इंफेक्शन ऐसा है कि रोज बढ़ रहे वहां छह भारती को कोरा में बैलेंस हो चुका है लेकिन अच्छी बात यह है कि इनमें से तीन लोगों को कोरोना वायरस के सिस्टम दिखाई दिए ।

उनकी हालत बेहतर बताई जा रही है और ये 6 लोग को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है जहां इनकी हालत ठीक बताई जा रही है। यह जो सिर्फ है वह मिलिट्री यानी कि एसोसिएशन में है। 19 फरवरी को इस चिप से कोई लोग बाहर नहीं निकल सकते लेकिन हालांकि अमेरिका ने अपने नागरिकों को इससे एक दिन पहले निकाल लिया गया था।

भारत ने अपने नागरिकों से कहा है कि वह सहयोग करें वहीं जापान ने ऑर्डर दिए हैं कि कुराटाइन टाइम में रहे।और उन्होंने कहा है कि उनके साथ भी सहयोग करें  आने वाली युग की बेहतरी के लिए भी है और आप यह सब देख रहे होंगे की इंफेक्शन बहुत ही जल्दी लोगों को पकड़ना है।

                      तीसरी खबर पर

कोरोना की रोकथाम के लिए सभी देश बेहतर से बेहतर प्रयास कर रहे हैं।
लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने कोरोना को नियंत्रण करने के लिए जो प्रयास करें हैं। उसका डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। इसका अंदाजा से लगाया जा सकता है की कोरोनावायरस के वक्त लोकप्रियता के मामले में प्रधानमंत्री ने बाकी देशों के लोकप्रिय नेता को पछाड़कर नंबर बन चुके हैं।
अमेरिका की मॉडर्न कंसर्न ने लोगों के बीच आर्थिक सामाजिक भावनात्मक और राजनीतिक पक्षियों को लेकर सर्वे करा है।
इस सर्वे पर एक दिलचस्प बात सामने निकल कर आई है की राजनीतिक प्रभाव के मामले में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरे देशों के शक्तिशाली नेताओं के बीच सबसे ताकतवर नेता के रूप में उभर कर आए।

इस  सर्वे में लोगों से पूछा गया कि कौन सा ऐसा नेता है जो कोरोना वायरस भरने सबसे बेहतर माना जा रहा है। इसके लिए मीडिया समूह ने हर देश के नागरिक से बात करें।
यह सर्वे 1 जनवरी से लेकर 14 अप्रैल टककर आ गया जिसमें पता चला कि लोगों ने नरेंद्र मोदी की नीतियों जो कोरोना वायरस के लिए लगाई गई थी। उसकी लोगों ने खूब प्रशंसा करें।

इतना ही नहीं इस बीच यह सर्वे मॉर्निंग 1 जनवरी से 14 जनवरी के बीच अमेरिका में रहने वाले लोग और अन्य देशों जो अमेरिका पर रुके थे उनसे बात करके यह पता चला कि।
कोरोना वायरस से उभरने में सबसे सफल नेताओं में सबसे पहला नाम भारत के प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी जी का नाम है।
दूसरे नंबर पर मेक्सिको के लो पास ना डो का नाम है।
तीसरे नंबर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरी जॉनसन का नाम है।
चौथी नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री  मॉरिस का नाम है।
पांचवें नंबर जर्मनी के प्रधानमंत्री एंजेला मार्केल , और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टुडे का ।
जब की डॉनल्ड ट्रंप एक लिस्ट में है ही नहीं है।
और सबसे लास्ट में डॉनल्ड ट्रंप का नंबर आया है। इस सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा आया है की लोगों से बातचीत करने में पता लगा है
कि अमेरिका के उम्र दराज लोगों में ट्रंप प्रशासन को लेकर बहुत गुस्सा है इतना ही नहीं 65 साल उम्र के लोगों का मानना है। की ट्रंप सरकार को आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने के बजाय लोगों की जान बजाना चाहिए।

और यह इसलिए क्योंकि अमेरिका में कोरोना वायरस बुरी तरह फैल चुका है और लॉन्ग डॉन में अच्छा फैसला नहीं लिया जा सका यानी कि जिन देशों ने कोरोना वायरस को हल्के में समझा। तो आज उनकी हालत बहुत खराब है।

और  वही पीएम मोदी ने कोरोना वायरस को खतरनाक समझा और बार-बार अभी नागरिकों को आग्रह किया कि घर पर हैं।
फिलहाल कई देशों में हाइड्रोक्सी क्लोरीन की दवा पहुंचाने के लिए भारत की खूब तारीफ की गई। जब विश्व बड़े से बड़े देशों घुटने पर आ गए हैं तो वही हमारे प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में और उनके पीछे खड़ी 130 करोड़ की जनता का साथ से उनको हिम्मत और मजबूती से खड़े होने की ताकत मिलती है।
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जय हिंद जय भारत।


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