कोरोना से जुड़ी बड़ी खुशखबरी आ गई।
हेलो दोस्तों तो कैसे हैं आप उम्मीद करता हूं बढ़िया होंगे स्वस्थ होंगे फिट होंगे ।भगवान आपको और आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें । आज हम बात करने जा रहे हैं
दोस्तों काफी दिनों से आप कोरोना वायरस की खबर सुनकर पढ़ चुके होंगे।जहां कहीं भी देखे वहां कोरोना बात चल रही है। टीवी खोलें तो हर टीवी चैनल कोरोना की खबर सुना रहा
जा रही है।
सोशल मीडिया में भी कोरोनावायरस ट्रेंड में चल रहा है और घरों में भी यही चर्चा हो रही हैं कि कब तक ये लॉकसाउन कब खत्म होगा और हम अपने काम पर जा सकेंगे।
कभी यह वायरस का तोड़ निकलेगा और जिंदगी सामान्य होगी।
दोस्तों हर वक्त सोचने से कोई हल नहीं निकलेगा उल्टा हमारे दिमाग में हमारे दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके बदले आप अपना मन कोई दूसरे कामों में लगा लीजिए।
आज मैं आपको अपने आर्टिकल में कुछ ऐसी चीज में बताऊंगा जो आपके मन को सुकून पहुंचाएगी।
दोस्तों इस कोरोना जैसी महामारी से हमें सुकून तभी मिल सकता है जब इसका वैक्सीन बनेगा।
मेडिकल साइंस मैं डेवलपमेंट होने की वजह से अब वैक्सीन थोड़े जल्दी बन सकते हैं।
वरना पहले वैक्सीन बनने में 20 से 30 साल लग जाते थे। लेकिन अभी वैक्सीन बनाने में सिर्फ डेढ़ साल लगता है जो हमें बहुत ज्यादा लग रहा है। लेकिन लाखों लोगों की जान हम खतरे में नहीं डाल सकते।
इसलिए वैक्सीन डेवलप करनेइसलिए सारे कदम बहुत ध्यान से रखना होते हैं। पहले लैब में उसे प्रोड्यूस करा जाता है उसके बाद उसे जानवरों पर टेस्ट करा जाता है
। और अगर टेस्ट सही रिजल्ट देता है तो उसे फ्री क्लीनिक टेस्ट पर इंसानों पर चेक किया जाता है। इसे हम क्लीनिकल ट्रायल कहते हैं।
यह टेस्टी तीन फेसों में होता है।
पहला फेस-इसमें टेस्ट हल्दी लोगों पर होता है।
फेस टू- मैं और ज्यादा लोगों पर टेस्ट किया जाता है। की अलग-अलग लोगों में यह कैसा इफेक्ट कर रही है।
फेस 3- में उन लोगों पर टेस्ट किया जाता है जहां यह वायरल बहुत तेजी से फैल रहा है।
फिर उसे प्रोड्यूस करने का लाइसेंस मिलता है। फिर इसे प्रोड्यूस करके लोगों तक पहुंचाने में करीबन 1 साल तो लग ही जाता है।
लेकिन पिछले 100 साल मे कोई भी बीमारी इतनी तेजी से नहीं फैली । इसलिए आप रिसर्च और कोई दूसरा तरीका निकाल के वैक्सीन को और जल्दी बनाने की कोशिश करेंगे।
वैसे ये वैक्सीन हर देश सबसे पहले बनाना चाहता है ।
इस काम के लिए 80 कंपनी और इंस्टिट्यूट लगे हुए हैं हर कोई इसे सबसे पहले बनाना चाहता है क्योंकि इसे बनाने के बाद वह बहुत अमीर हो जाएंगे।
लेकिन वैक्सीन बनाने को लेकर कंपटीशन से हमें फायदा यह है कि वैक्सीन बहुत जल्दी बनने के चांस है। एक कंपनी ने यह भी दावा कर दिया है कि वहां जून तक वैक्सीन बना देंगे ।
Oxford यूनिवर्सिटी के वैक्स नॉलेजी एक प्रोफेसर ने कहा की वैक्सीन सितंबर तक बन जाना चाहिए।
अब यह नहीं पता की कब तक बनेगी जून तक जुलाई तक या अगले साल 2021।
वहीं कहीं देशों से अच्छी खबर आई है की कोरोनावायरस उतनी तेजी से नहीं फैली पा रहा। जितना पहले फैल रहा था।
जैसे इटली जर्मनी स्पेन बहुत सारी तबाही मचाई थी।
कड़े फैसले प्रॉपर मेडिकल किट की वजह से अब कोरोनावायरस के केस कमा रहे हैं ।
आ तो रहे हैं लेकिन बहुत कम जिसकी वजह से स्पेन के कुछ इलाकों में लॉक डाउन हटा दिया गया है।
इटली में बुक्स शॉप और बच्चों के कपड़ों की दुकानें खुल चुकी हैं।
और स्पेन में 300000 लोगों को जॉब में जाने का आदेश मिल चुका है। डेनमार्क स्कूल खुलने लगे हैं और जर्मनी में
नेक्स्ट वीक से लोग डॉन में कमी आ जाएगी।
दूसरी तरफ ताइवान में कभी लॉग डाउन लगाया ही नहीं गया।
क्योंकि इन देशों ने स्टार्टिंग से ही सख्त नियम और कानून होने की वजह से कोरोना वायरस की बीमारी बिल्कुल रोक दिया।
हांगकांग और ताइवान ने सास को ऑलरेडी देख था और इसी आउटगोइंग वायरस की वजह से सीख लेकर । इन देशों ने
कोरोना वायरस जैसी बीमारी से डटकर सामना किया।
और सिंगापुर और ताइवान से सीख लेकर दुनिया के सभी देश को स्टेज जी बनानी चाहिए और ऑलरेडी बना भी रहे हैं।
अगली बार दोस्तों यह की इस कोरोनावायरस से कई लोग ठीक भी हो जाते हैं जरूरी नहीं कि जिसको यह वायरस हो गया वह सीधे मर ही जाएगा।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं की कोरोना वायरस को हल्के में ले कर हम बेफिक्र होकर घूमने लग जाए।
इससे पहले कुछ देशों ने इस वायरस को हल्के में लिया। जिसके कारण उनको बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी उन्हीं देशों में रसिया और यूएसए हैं। क्योंकि भले ही इससे वह ठीक हो जाए लेकिन वह दूसरे को इन फैक्ट कर सकते है।
और अगर वह मर गए तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा। दोस्तों इस आर्टिकल के खत्म हो जाने से पहले 500000 लोग ठीक भी हो जाएंगे जोकि बहुत अच्छी बात है।
लेकिन मीडिया इसके कुछ और ही आंकड़े दिखा रही है। वह सिर्फ मरने वाले के आंकड़े दिखा रहे हैं। जबकि उल्टा यह है मरने वाले से ज्यादा ठीक होने वाले ज्यादा है।
मीडिया वाले बस आपको डरा ही रहे हैं । डरा जरूरी है
लेकिन इतना ज्यादा मत डर आइए की।कोरोना के डर के मारे आप अपने आपको कुछ करना ले।
जैसे कई देशों से सुसाइड की खबरें भी मिली है। दोस्तों सबसे पहले किसी बीमारी का पता लगाना अगर हम पता ही नहीं लगा पा रहे हैं। तो हम उस बीमारी का पता कैसे लगा पाएंगे।
लेकिन इस बीमारी के केस में कुछ अलग ही है इसका टेस्ट 13 जनवरी से अवेलेबल हो गया था और तो और इस टेस्ट पर इंप्रूवमेंट हो रहे हैं। टेस्टिंग की सेंसर टीवी और उसका रिजल्ट हर चीज इंप्रूव हो रही है।
यहां तक कि 27 मार्च को ऐसा इंस्ट्रूमेंट हुआ है की 5 मिनट के अंदर रिजल्ट दे देगी। एक इस वायरस की एक प्रॉब्लम यह भी है कि यह सितम बहुत देर से शुरू करता है लेकिन कुछ हल्दी लोगों के लिए हो जाता है। और सेंटम दिखते नहीं हो तो यह दूसरे लोगों पर फैल जाता है। और जो हेल्दी लोग जिन्हें पहले हुआ था वह ठीक हो जाते हैं। ऐसे लोगों की टेस्टिंग करना भी जरूरी है क्योंकि उनकी वजह से यह वायरस हो जाता है।
सीडीएन ने ऐसी चीज बनाई है कि किसी भी हल्दी इंसान का टेस्ट करके बता सकती हैं। कि पहले इनको कोरोनावायरस था या नहीं।
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जय हिंद जय भारत।
https://docosib.blogspot.com/2020/04/blog-post_20.html
10 दिन के अंदर हो जाएगा खत्म कोरोना वायरस।
जा रही है।
सोशल मीडिया में भी कोरोनावायरस ट्रेंड में चल रहा है और घरों में भी यही चर्चा हो रही हैं कि कब तक ये लॉकसाउन कब खत्म होगा और हम अपने काम पर जा सकेंगे।
कभी यह वायरस का तोड़ निकलेगा और जिंदगी सामान्य होगी।
दोस्तों हर वक्त सोचने से कोई हल नहीं निकलेगा उल्टा हमारे दिमाग में हमारे दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके बदले आप अपना मन कोई दूसरे कामों में लगा लीजिए।
आज मैं आपको अपने आर्टिकल में कुछ ऐसी चीज में बताऊंगा जो आपके मन को सुकून पहुंचाएगी।
दोस्तों इस कोरोना जैसी महामारी से हमें सुकून तभी मिल सकता है जब इसका वैक्सीन बनेगा।
मेडिकल साइंस मैं डेवलपमेंट होने की वजह से अब वैक्सीन थोड़े जल्दी बन सकते हैं।
वरना पहले वैक्सीन बनने में 20 से 30 साल लग जाते थे। लेकिन अभी वैक्सीन बनाने में सिर्फ डेढ़ साल लगता है जो हमें बहुत ज्यादा लग रहा है। लेकिन लाखों लोगों की जान हम खतरे में नहीं डाल सकते।
इसलिए वैक्सीन डेवलप करनेइसलिए सारे कदम बहुत ध्यान से रखना होते हैं। पहले लैब में उसे प्रोड्यूस करा जाता है उसके बाद उसे जानवरों पर टेस्ट करा जाता है
। और अगर टेस्ट सही रिजल्ट देता है तो उसे फ्री क्लीनिक टेस्ट पर इंसानों पर चेक किया जाता है। इसे हम क्लीनिकल ट्रायल कहते हैं।
यह टेस्टी तीन फेसों में होता है।
पहला फेस-इसमें टेस्ट हल्दी लोगों पर होता है।
फेस टू- मैं और ज्यादा लोगों पर टेस्ट किया जाता है। की अलग-अलग लोगों में यह कैसा इफेक्ट कर रही है।
फेस 3- में उन लोगों पर टेस्ट किया जाता है जहां यह वायरल बहुत तेजी से फैल रहा है।
फिर उसे प्रोड्यूस करने का लाइसेंस मिलता है। फिर इसे प्रोड्यूस करके लोगों तक पहुंचाने में करीबन 1 साल तो लग ही जाता है।
लेकिन पिछले 100 साल मे कोई भी बीमारी इतनी तेजी से नहीं फैली । इसलिए आप रिसर्च और कोई दूसरा तरीका निकाल के वैक्सीन को और जल्दी बनाने की कोशिश करेंगे।
वैसे ये वैक्सीन हर देश सबसे पहले बनाना चाहता है ।
इस काम के लिए 80 कंपनी और इंस्टिट्यूट लगे हुए हैं हर कोई इसे सबसे पहले बनाना चाहता है क्योंकि इसे बनाने के बाद वह बहुत अमीर हो जाएंगे।
लेकिन वैक्सीन बनाने को लेकर कंपटीशन से हमें फायदा यह है कि वैक्सीन बहुत जल्दी बनने के चांस है। एक कंपनी ने यह भी दावा कर दिया है कि वहां जून तक वैक्सीन बना देंगे ।
Oxford यूनिवर्सिटी के वैक्स नॉलेजी एक प्रोफेसर ने कहा की वैक्सीन सितंबर तक बन जाना चाहिए।
अब यह नहीं पता की कब तक बनेगी जून तक जुलाई तक या अगले साल 2021।
वहीं कहीं देशों से अच्छी खबर आई है की कोरोनावायरस उतनी तेजी से नहीं फैली पा रहा। जितना पहले फैल रहा था।
जैसे इटली जर्मनी स्पेन बहुत सारी तबाही मचाई थी।
कड़े फैसले प्रॉपर मेडिकल किट की वजह से अब कोरोनावायरस के केस कमा रहे हैं ।
आ तो रहे हैं लेकिन बहुत कम जिसकी वजह से स्पेन के कुछ इलाकों में लॉक डाउन हटा दिया गया है।
इटली में बुक्स शॉप और बच्चों के कपड़ों की दुकानें खुल चुकी हैं।
और स्पेन में 300000 लोगों को जॉब में जाने का आदेश मिल चुका है। डेनमार्क स्कूल खुलने लगे हैं और जर्मनी में
नेक्स्ट वीक से लोग डॉन में कमी आ जाएगी।
दूसरी तरफ ताइवान में कभी लॉग डाउन लगाया ही नहीं गया।
क्योंकि इन देशों ने स्टार्टिंग से ही सख्त नियम और कानून होने की वजह से कोरोना वायरस की बीमारी बिल्कुल रोक दिया।
हांगकांग और ताइवान ने सास को ऑलरेडी देख था और इसी आउटगोइंग वायरस की वजह से सीख लेकर । इन देशों ने
कोरोना वायरस जैसी बीमारी से डटकर सामना किया।
और सिंगापुर और ताइवान से सीख लेकर दुनिया के सभी देश को स्टेज जी बनानी चाहिए और ऑलरेडी बना भी रहे हैं।
अगली बार दोस्तों यह की इस कोरोनावायरस से कई लोग ठीक भी हो जाते हैं जरूरी नहीं कि जिसको यह वायरस हो गया वह सीधे मर ही जाएगा।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं की कोरोना वायरस को हल्के में ले कर हम बेफिक्र होकर घूमने लग जाए।
इससे पहले कुछ देशों ने इस वायरस को हल्के में लिया। जिसके कारण उनको बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ी उन्हीं देशों में रसिया और यूएसए हैं। क्योंकि भले ही इससे वह ठीक हो जाए लेकिन वह दूसरे को इन फैक्ट कर सकते है।
और अगर वह मर गए तो उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा। दोस्तों इस आर्टिकल के खत्म हो जाने से पहले 500000 लोग ठीक भी हो जाएंगे जोकि बहुत अच्छी बात है।
लेकिन मीडिया इसके कुछ और ही आंकड़े दिखा रही है। वह सिर्फ मरने वाले के आंकड़े दिखा रहे हैं। जबकि उल्टा यह है मरने वाले से ज्यादा ठीक होने वाले ज्यादा है।
मीडिया वाले बस आपको डरा ही रहे हैं । डरा जरूरी है
लेकिन इतना ज्यादा मत डर आइए की।कोरोना के डर के मारे आप अपने आपको कुछ करना ले।
जैसे कई देशों से सुसाइड की खबरें भी मिली है। दोस्तों सबसे पहले किसी बीमारी का पता लगाना अगर हम पता ही नहीं लगा पा रहे हैं। तो हम उस बीमारी का पता कैसे लगा पाएंगे।
लेकिन इस बीमारी के केस में कुछ अलग ही है इसका टेस्ट 13 जनवरी से अवेलेबल हो गया था और तो और इस टेस्ट पर इंप्रूवमेंट हो रहे हैं। टेस्टिंग की सेंसर टीवी और उसका रिजल्ट हर चीज इंप्रूव हो रही है।
यहां तक कि 27 मार्च को ऐसा इंस्ट्रूमेंट हुआ है की 5 मिनट के अंदर रिजल्ट दे देगी। एक इस वायरस की एक प्रॉब्लम यह भी है कि यह सितम बहुत देर से शुरू करता है लेकिन कुछ हल्दी लोगों के लिए हो जाता है। और सेंटम दिखते नहीं हो तो यह दूसरे लोगों पर फैल जाता है। और जो हेल्दी लोग जिन्हें पहले हुआ था वह ठीक हो जाते हैं। ऐसे लोगों की टेस्टिंग करना भी जरूरी है क्योंकि उनकी वजह से यह वायरस हो जाता है।
सीडीएन ने ऐसी चीज बनाई है कि किसी भी हल्दी इंसान का टेस्ट करके बता सकती हैं। कि पहले इनको कोरोनावायरस था या नहीं।
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धन्यवाद ।
जय हिंद जय भारत।
https://docosib.blogspot.com/2020/04/blog-post_20.html
























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